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देहरादून: देहरादून की विशेष पोक्सो अदालत ने 9 साल के नाबालिग बच्चे से कुकर्म के मामले में आरोपी को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने माना कि पीड़ित की गवाही, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य आपस में पूरी तरह मेल खाते हैं। घटना फरवरी 2021 की है, जबकि अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाया। विशेष न्यायाधीश (POCSO) अर्चना सागर ने दोषी रायपुर थाना क्षेत्र के वाणी विहार जैन प्लाट निवासी मो. आमिर को 20 साल की कठोर कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

मामला थाना रायपुर क्षेत्र का है। 22 फरवरी 2021 को 9 साल का नाबालिग बच्चा कॉलोनी में खेल रहा था। इसी दौरान आरोपी उसे बहला-फुसलाकर सुनसान जगह पर ले गया, जहां उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। घटना के बाद बच्चा किसी तरह घर पहुंचा और अपनी मां को पूरी आपबीती बताई। इसके बाद परिजनों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

एफआईआर से लेकर ट्रायल तक

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विशेष लोक अभियोजक अल्पना थापा ने बताया कि पीड़ित के पिता की रिपोर्ट पर उसी दिन FIR दर्ज की गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की। मामले में IPC की धारा 377 और POCSO एक्ट की धारा 5 (ड)/6 के तहत मुकदमा चला। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़ित, उसके माता-पिता, जांच अधिकारी, मेडिकल अफसर और स्कूल से जुड़े गवाहों सहित कुल 8 गवाह पेश किए।

पीड़ित की गवाही को माना गया भरोसेमंद

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नाबालिग पीड़ित की गवाही स्वाभाविक, स्पष्ट और घटनाक्रम से पूरी तरह मेल खाती है। क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान भी उसके बयान में कोई बड़ा विरोधाभास नहीं पाया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में नाबालिग पीड़ित की गवाही को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि वह अकेला गवाह है।

मेडिकल रिपोर्ट ने आरोपों की पुष्टि की

मेडिकल जांच में पीड़ित के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए। डॉक्टर की रिपोर्ट में साफ तौर पर जबरन यौन कृत्य के संकेत मिले। कोर्ट ने मेडिकल साक्ष्यों को अभियोजन के पक्ष में मजबूत कड़ी माना।

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बचाव पक्ष की दलीलें खारिज

आरोपी की ओर से मामले को झूठा और फंसाए जाने की दलील दी गई, लेकिन कोर्ट ने कहा कि बचाव पक्ष कोई ऐसा साक्ष्य पेश नहीं कर सका जिससे अभियोजन की कहानी पर संदेह पैदा हो।

विशेष न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला नाबालिग के खिलाफ गंभीर यौन अपराध का है, जिसमें आरोपी का कृत्य समाज के लिए बेहद घातक है। सभी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया गया। सजा पर अलग से आदेश पारित किया गया। कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़ित को दो लाख रुपए की देने का आदेश दिया है।

क्यों अहम है यह फैसला

नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में पीड़ित की गवाही को मजबूत आधार माना गया

POCSO कानून के तहत कठोर संदेश

लंबे ट्रायल के बावजूद न्याय मिलने की मिसाल

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