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उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के एक अस्पताल में तैनात डॉक्टर के मुन्ना भाई होने का संदेह जताया गया है, शिकायत के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने डॉक्टर के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं, स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक डॉक्टर ने 2010 में श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रा के रूप में एडमिशन लिया था, और उसे 2017 में इंटर्नशिप के बाद स्थाई नौकरी मिली, तब से वह विभिन्न अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहा है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ आशुतोष सायना के मुताबिक डॉक्टर के एमबीबीएस छात्र के रूप में बायोमैट्रिक आईडेंटिफिकेशन फार्म पर लगाए गए फिंगरप्रिंट तथा परीक्षा के समय लगाए गए फिंगरप्रिंट की फोरेंसिक जांच के निर्देश दिए गए हैं, डॉक्टर के खिलाफ मिली एक शिकायत के बाद यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आया था, चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने कमेटी बनाकर डॉक्टर के खिलाफ जांच भी की लेकिन उसमें डॉक्टर के सभी दस्तावेज सही पाए गए हैं, शिकायत कर्ता द्वारा डॉक्टर के खिलाफ विभिन्न आयोगों में शिकायत के बाद अब श्रीनगर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कोतवाली में डॉक्टर की जांच के 

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