ख़बर शेयर करें -

जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण ने आज भू स्वामियों के लिए नियम और शर्तों को लेकर प्राधिकरण के सचिव पंकज उपाध्याय ने प्रेस नोट जारी करते हुए बताया की, सभी भू-स्वामियों के संज्ञान में लाना है कि वर्ष 2016 में भारत सरकार द्वारा भू-स्वामियों, भू-विकासकर्ताओं एवं खरीदारों के हितों के संरक्षण हेतु रियल स्टेट एक्ट-2016 को लागू किया गया। इस अधिनियम की धारा-3 ( 2 ) (a) के अन्तर्गत 500 वर्गमीटर से अधिक के भू-विकास परियोजना एवं 08 यूनिट के अधिक फ्लैट के अपार्टमैंट की परियोजना का रेरा पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।.

उक्त के दृष्टिगत निम्न तथ्यों को स्पष्ट किया जाता है…
(1) जनपद नैनीताल में जिला विकास प्राधिकरण के क्षेत्रान्तर्गत भू-विन्यास, अपार्टमैंट निर्माण, मल्टी हाउसिंग निर्माण, ले-आउट निर्माण, निजी आवासीय / व्यवसायिक भवनों के निर्माण आदि से पूर्व जिला विकास प्राधिकरण से उत्तराखण्ड भवन निर्माण एवं विकास उपविधि के अन्तर्गत मानचित्र स्वीकृत कराना अनिवार्य है।
(2) बिना स्वीकृत मानचित्र के उक्त प्रकार की परियोजना निर्माण एवं विक्रय करना अवैध है।
(3) अवैध प्लाटिंग / ले-आउट का निर्माण कर विक्रय करने से अनियोजित विकास एवं अवैध निर्माण की गतिविधि हो रही है। क्रेताओं के हित नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। लैण्ड फ्रॉड के प्रकरणों में वृद्धि हो रही है। नवीन आवासीय क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, विद्युत, पेयजल की गम्भीर समस्याऐं उत्पन्न हो रही हैं ।

यह भी पढ़ें 👉  उफान पर मां गंगा! लोगों को किया गया रेस्क्यू…

(4) कृषि भूमि के सम्बन्ध में स्पष्ट किया जाता है कि कृषि भूमि को कृषि प्रयोजन हेतु क्रय-विक्रय करने पर किसी प्रकार का कोई प्रतिबन्ध नहीं है (ज0वि०एवं भू-व्यवस्था अधि0 1950 के प्रतिबन्धों के आधार पर)।
(5) एक बड़े भूखण्ड / भूमि क्षेत्रफल को सड़क आदि का निर्माण कर छोटे-छोटे भूखण्ड बना कर रेरा का उल्लंघन न करने का शपथ पत्र देकर भूमि क्रय-विक्रय करना अवैधानिक कृत्य है। इससे अनियोजित विकास के साथ-साथ राज्य सरकार को वित्तीय हानि होती है तथा क्रेता के हित नकारात्मक रूप से प्रभावित होते हैं।
(6) आवासीय प्रयोजन हेतु भूमि क्रय करने वाले क्रेताओं एवं अपने निवास हेतु फ्लैट क्रय करने वाले क्रेताओं से अपील है कि प्लाट अथवा फ्लैट खरीदने से पूर्व प्लाटिंग / ग्रुप हाउसिंग / मल्टीपल हाउसिंग मानचित्र की स्वीकृति का परीक्षण अवश्य कर लें और उसका उल्लेख विक्रय पत्र में अवश्य करायें। ऐसा करने से क्रेता के हित सुरक्षित होंगे तथा विवाद की स्थितियां समाप्त होंगी।
(7) रेरा सम्बन्धी प्राविधानों एवं विकास प्राधिकरण से सम्बन्धित नियमों के सम्बन्ध में तथा ले-आउट / ग्रुप हाउसिंग / मल्टीपल हाउसिंग / आवासीय / व्यवसायिक भवन मानचित्रों की स्वीकृति के सम्बन्ध में किसी प्रकार का संशय होने पर स्थिति स्पष्ट करने हेतु अथवा जानकारी प्राप्त करने हेतु जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, नैनीताल के सक्षम प्राधिकारियों से जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

यह भी पढ़ें 👉  uttarakhand: X CM हरीश रावत की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त, बाल बाल बचे....